उत्तर प्रदेश का FY26 में ₹63,000 करोड़ उत्पाद शुल्क राजस्व का लक्ष्य: शराब बिक्री में बढ़ोतरी

Table of Contents

उत्तर प्रदेश (UP) ने FY26 के लिए उत्पाद शुल्क राजस्व में ₹63,000 करोड़ का भारी-भरकम लक्ष्य रखा है, जैसा कि मई 2025 में घोषणा हुई। ये FY25 के ₹52,573 करोड़ से 20% की बड़ी छलांग है, जिसे नई ई-लॉटरी नीति और प्रीमियम शराब ब्रांड्स में बढ़ोतरी ने संभव बनाया। UP का उत्पाद शुल्क विभाग, मंत्री नितिन अग्रवाल की अगुआई में, पूरी ताकत झोंक रहा है, और ₹7,900 करोड़ के निवेश से नई डिस्टिलरी और माइक्रो-ब्रुअरी बनने की उम्मीद है। ये सिर्फ पैसों की बात नहीं—ये एकाधिकार तोड़ने, किसानों को फायदा देने और UP को शराब उद्योग का पावरहाउस बनाने का मिशन है। इस 4500-5000 शब्दों के पोस्ट में, हम इसे सरल हिंदी में समझाएंगे, थोड़ा देसी तड़का डालेंगे, और Google पर टॉप रैंक के लिए SEO-friendly बनाएंगे। चलो, UP की इस देसी दारू क्रांति में गोता लगाते हैं!

स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स, 12 मई 2025

ये ₹63,000 करोड़ का उत्पाद शुलSRFक लक्ष्य क्या है?

उत्पाद शुल्क राजस्व वो पैसा है जो UP सरकार शराब—जैसे कि लिकर, बीयर, और वाइन—की बिक्री पर टैक्स से कमाती है, जो दुकानों, बार, या डिस्टिलरी में बिकती है। FY26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) के लिए, UP का लक्ष्य ₹63,000 करोड़ जुटाने का है, जो FY25 के ₹52,573 करोड़ से ज्यादा है, जिसने ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य को पहले ही पार कर लिया था। ये 20% की बढ़ोतरी दिखाती है कि UP शराब के धंधे पर बड़ा दांव लगा रहा है ताकि सड़कें, स्कूल, और कल्याण योजनाओं को फंड कर सके।

इसके पीछे का मास्टरमाइंड? एक नई ई-लॉटरी नीति जो शराब की दुकानों के लाइसेंस को निष्पक्ष तरीके से बांटती है, और प्रीमियमाइजेशन—यानी महंगी, हाई-एंड शराब ब्रांड्स को बढ़ावा देना। मंत्री नितिन अग्रवाल ने द इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि ये कदम, साथ ही एकाधिकार पर नकेल कसने से, राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है। और हां, ₹7,900 करोड़ का निवेश नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बनाएगा, जिससे UP शराब का हब बनेगा।

क्यों है UP का उत्पाद शुल्क राजस्व इतना बड़ा मसला?

भाई, उत्पाद शुल्क राजस्व सिर्फ दारू की बिक्री की बात नहीं—ये UP की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये रहा इसका महत्व:

  1. विकास के लिए फंड: उत्पाद शुल्क UP का दूसरा सबसे बड़ा राजस्व स्रोत है, GST/VAT के बाद, जो कुल राजस्व का 25% देता है। FY25 में इसने ₹52,574 करोड़ दिए, जिससे हाईवे और PM-KISAN जैसी योजनाएं चलीं।
  2. आर्थिक विकास: UP का लक्ष्य $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है, और उत्पाद शुल्क इसमें मदद करता है। FY26 में राज्य का टैक्स राजस्व ₹5.5 ट्रिलियन तक पहुंचने वाला है, जिसमें उत्पाद शुल्क बड़ा रोल निभाएगा।
  3. नौकरियां और निवेश: नई डिस्टिलरी और ब्रुअरी से हजारों नौकरियां बनेंगी, और UP के निवेश पोर्टल के मुताबिक 46 प्रोजेक्ट्स से ₹7,888 करोड़ का निवेश आएगा।
  4. किसानों को फायदा: UP स्थानीय फलों से वाइनरी को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों की कमाई बढ़ेगी। ये शराब को ग्रामीण विकास से जोड़ता है, खासकर गन्ना किसानों के लिए (UP गन्ने का टॉप उत्पादक है)।

ये लक्ष्य सिर्फ नंबरों का खेल नहीं—ये UP को अमीर, मजबूत, और आत्मनिर्भर बनाने की जुगत है।

UP यहाँ तक कैसे पहुंचा? उत्पाद शुल्क की यात्रा

UP का उत्पाद शुल्क राजस्व छह साल में तिगुना हो गया है। चलो, पीछे मुड़कर देखते हैं:

  • FY17 (2016-17): ₹14,273 करोड़, जब BJP और CM योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली।
  • FY18 (2017-18): ₹17,320 करोड़, जब UP ने उत्पाद शुल्क नीति में सुधार शुरू किए।
  • FY22 (2021-22): ₹36,321 करोड़, नीतियों के लागू होने से बड़ा उछाल।
  • FY23 (2022-23): ₹41,250 करोड़, जिसने UP को भारत का टॉप उत्पाद शुल्क कमाने वाला राज्य बनाया, कर्नाटक के ₹29,790 करोड़ को पछाड़ते हुए।
  • FY24 (2023-24): ₹47,600 करोड़, FY23 से 15.39% की बढ़ोतरी।
  • FY25 (2024-25): ₹52,573 करोड़, जो ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य को पार कर गया।
  • FY26 लक्ष्य: ₹63,000 करोड़, 20% की बढ़ोतरी, जो रुकने का नाम नहीं ले रहा।

ये कमाल है—UP मामूली खिलाड़ी से देश का उत्पाद शुल्क बादशाह बन गया, स्मार्ट नीतियों और सख्ती की बदौलत।

₹63,000 करोड़ के लक्ष्य को क्या चला रहा है?

UP बस उम्मीद नहीं कर रहा—उसके पास ठोस प्लान है। ये रहे FY26 लक्ष्य के पीछे के इंजन:

  1. ई-लॉटरी नीति
    नई ई-लॉटरी सिस्टम शराब दुकानों के लाइसेंस निष्पक्ष तरीके से बांटती है, पक्षपात और कार्टेल को खत्म करते हुए। 2018 में शुरू हुई इस नीति ने एक व्यक्ति को पूरे राज्य में सिर्फ दो दुकानों का लाइसेंस सीमित किया, जिससे एकाधिकार टूटा। अब ज्यादातर रिटेल दुकानें इस पारदर्शी सिस्टम से चलती हैं, जिससे राजस्व बढ़ा।
  2. प्रीमियमाइजेशन में बढ़ोतरी
    UP प्रीमियम शराब ब्रांड्स पर फोकस कर रहा है, जो महंगे हैं और ज्यादा टैक्स लाते हैं। नितिन अग्रवाल का कहना है कि UP में दिल्ली से ज्यादा ब्रांड्स रजिस्टर्ड हैं, जिससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खरीदार UP की ओर आ रहे हैं।
  3. निवेश का बूम
    UP को 46 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹7,900 करोड़ के निवेश की उम्मीद है, जिसमें 2022-23 से लाइसेंस प्राप्त 19 नई डिस्टिलरी और 23 माइक्रो-ब्रुअरी शामिल हैं। ये ज्यादा शराब बनाएंगे, यानी ज्यादा बिक्री और टैक्स।
  4. नकली शराब पर नकेल
    UP के उत्पाद शुल्क विभाग ने अवैध शराब पर कड़ी कार्रवाई की, जो पहले राजस्व खा जाती थी। FY23 में नकली शराब से कोई मौत नहीं हुई, जो बड़ी जीत है। मजबूत टीमें और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम बाजार को साफ रखते हैं।
  5. डिजिटल बदलाव
    निवेश मित्र पोर्टल और UP उत्पाद शुल्क पोर्टल लाइसेंसिंग और अनुपालन को आसान बनाते हैं, जिससे नए बिजनेस आकर्षित होते हैं। ई-लॉटरी सिस्टम का डिजिटल सेटअप पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाता है।
  6. किसान-वाइनरी कनेक्शन
    UP की नई नीति स्थानीय फलों से वाइनरी को बढ़ावा देती है, जिससे किसान ज्यादा उपज बेच पाते हैं। ये न सिर्फ ग्रामीण आय बढ़ाता है, बल्कि शराब राजस्व को कृषि से जोड़ता है, जो भारत के टॉप गन्ना उत्पादक राज्य के लिए स्मार्ट मूव है।

स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड, 13 फरवरी 2025; X पोस्ट by @StoxBox_

UP का दूसरे राज्यों से मुकाबला

UP का उत्पाद शुल्क राजस्व बाकियों से कहीं आगे है। देखो कैसे:

  • कर्नाटक: कभी लीडर था, लेकिन FY23 में ₹29,790 करोड़ कमाए, जबकि UP ने ₹41,250 करोड़। UP अब बेकसूर बादशाह है।
  • पंजाब: नकली शराब और कम राजस्व से जूझ रहा, UP के स्केल के आसपास भी नहीं।
  • दिल्ली: प्रीमियम ब्रांड्स तो हैं, लेकिन UP से कम रजिस्टर्ड ब्रांड्स, और ग्राहक UP के बाजारों की ओर जा रहे।

UP की नीतिगत सुधारों, सख्ती, और निवेश की तिकड़ी ने इसे भारत में उत्पाद शुल्क का गोल्ड स्टैंडर्ड बना दिया।

आर्थिक प्रभाव क्या है?

ये ₹63,000 करोड़ का लक्ष्य सिर्फ शराब की बात नहीं—ये UP की अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर शॉट है। ये रहा इसका असर:

  1. विकास के लिए राजस्व
    उत्पाद शुल्क UP के बजट का 25% फंड करता है, जिससे जेवर हवाई अड्डा, स्वास्थ्य कार्यक्रम, और किसान योजनाएं चलती हैं। FY25 में UP का टैक्स राजस्व ₹2.13 लाख करोड़ था, जिसमें उत्पाद शुल्क ₹52,574 करोड़ था। FY26 की बढ़ोतरी और प्रोजेक्ट्स को फंड करेगी।
  2. नौकरियां
    नई डिस्टिलरी और ब्रुअरी से हजारों नौकरियां बनेंगी, फैक्ट्री वर्कर्स से लेकर सप्लाई चेन रोल तक। 46 प्रोजेक्ट्स से ₹7,888 करोड़ का निवेश लखनऊ, नोएडा, और वाराणसी जैसे शहरों में आर्थिक गतिविधि को बढ़ाएगा।
  3. वित्तीय सेहत
    FY26 में UP का राजकोषीय घाटा ₹91,400 करोड़ अनुमानित है, जो इसके ₹30.77 ट्रिलियन GSDP का 2.97% है, 3% की सीमा से कम। मजबूत उत्पाद शुल्क राजस्व उधार को काबू में रखता है, जिसके लिए नीति आयोग ने वित्तीय अनुशासन की तारीफ की।
  4. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट
    वाइनरी और गन्ना-आधारित इथेनॉल उत्पादन (UP यहाँ अग्रणी है) का मतलब है किसानों के लिए ज्यादा पैसा। ये ग्रामीण बाजारों को मजबूत करता है, जहां नकदी राजा है।
  5. निवेश का आकर्षण
    UP के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 ने उत्पाद शुल्क क्षेत्र में ₹31,433 करोड़ के प्रस्ताव खींचे। FY26 के प्रोजेक्ट्स दिखाते हैं कि UP शराब बिजनेस के लिए हॉटस्पॉट बन रहा है।

स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड, 5 मार्च 2025

₹63,000 करोड़ तक पहुंचने की चुनौतियां

सब कुछ आसान नहीं है। ये रहे कुछ रुकावटें जिनका UP को सामना करना पड़ सकता है:

  1. नकली शराब का खतरा
    सख्ती के बावजूद, अवैध शराब, खासकर सीमावर्ती इलाकों में, घुसपैठ कर सकती है। सख्ती बनाए रखना जरूरी है।
  2. बाजार में भीड़
    इतनी नई डिस्टिलरी के साथ, ज्यादा सप्लाई से कीमतें और टैक्स कम हो सकते हैं, जब तक डिमांड बनी रहे। प्रीमियमाइजेशन को डिलीवर करना होगा।
  3. नीतिगत जोखिम
    ई-लॉटरी सिस्टम की निष्पक्षता इसके अमल पर निर्भर है। कोई गड़बड़ी या पक्षपात भरोसे और राजस्व को नुकसान पहुंचा सकता है।
  4. सामाजिक चिंताएं
    शराब की ज्यादा बिक्री से नशे या अपराध की चिंता बढ़ती है। UP को राजस्व और जन स्वास्थ्य में संतुलन बनाना होगा, जैसे नकली शराब से मौतें रोकना।
  5. आर्थिक मंदी
    अगर भारत की अर्थव्यवस्था या ग्रामीण डिमांड (जैसे खराब मानसून से) गिरती है, तो शराब की बिक्री प्रभावित हो सकती है, जिससे लक्ष्य पर असर पड़ेगा।

UP इन चुनौतियों से कैसे निपट रहा है?

UP का उत्पाद शुल्क विभाग, नितिन अग्रवाल और CM योगी आदित्यनाथ की अगुआई में, तैयार है:

  • टेक-आधारित सख्ती: ऑनलाइन ट्रैकिंग और डिजिटल अप्रूवल्स अवैध बिक्री रोकते हैं और पारदर्शिता बढ़ाते हैं।
  • प्रीमियम फोकस: हाई-एंड ब्रांड्स को बढ़ावा देकर UP प्रति बोतल ज्यादा टैक्स की ओर बढ़ रहा है, जो डिमांड में कमी को संभालेगा।
  • निवेश का जोर: UP निवेश पोर्टल के 46 प्रोजेक्ट्स उत्पादन क्षमता में स्थिर वृद्धि सुनिश्चित करते हैं।
  • किसान कनेक्शन: वाइनरी और इथेनॉल ग्रामीण डिमांड को मजबूत रखते हैं, शराब को कृषि से जोड़ते हुए।
  • एकाधिकार विरोधी कदम: दो दुकानों की लाइसेंस सीमा और ई-लॉटरी सिस्टम बाजार को प्रतिस्पर्धी रखते हैं, कार्टेल को रोकते हुए।

आपके लिए इसका क्या मतलब है?

तुम सोच रहे होगे, “भाई, ये उत्पाद शुल्क राजस्व मेरा क्या लेना-देना?” ये रहा इसका असर:

  • बेहतर सुविधाएं: ज्यादा पैसा मतलब लखनऊ हो या गांव, बेहतर सड़कें, स्कूल, या अस्पताल।
  • नौकरियां: नई डिस्टिलरी और दुकानें तुम्हारे या दोस्तों के लिए काम ला सकती हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
  • सस्ती प्रीमियम दारू: ज्यादा ब्रांड्स से हाई-एंड शराब की कीमतें कम हो सकती हैं, वीकेंड पार्टी को सस्ता बनाते हुए।
  • किसानों को फायदा: अगर तुम किसान परिवार से हो, तो वाइनरी या इथेनॉल प्लांट ज्यादा कमाई ला सकते हैं।
  • मजबूत अर्थव्यवस्था: अमीर UP मतलब बिजनेस से लेकर शिक्षा तक ज्यादा मौके।

लेकिन एक दूसरा पहलू भी है—शराब की ज्यादा बिक्री से स्वास्थ्य या सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं, तो UP को संतुलन बनाना होगा।

UP का राजस्व संदर्भ में

UP का ₹63,000 करोड़ का लक्ष्य एक बड़ी वित्तीय कहानी का हिस्सा है:

  • टैक्स राजस्व: FY26 में UP का कुल टैक्स राजस्व ₹5.5 ट्रिलियन तक पहुंचेगा, जो FY25 के ₹4.75 ट्रिलियन से 16% ज्यादा है। उत्पाद शुल्क इसमें बड़ा रोल निभाता है।
  • राजकोषीय घाटा: FY26 में 2.97% GSDP पर, UP का घाटा काबू में है, उत्पाद शुल्क जैसे मजबूत राजस्व की बदौलत।
  • उधार: FY26 में मार्केट उधार ₹6.43 ट्रिलियन तक जाएगा, लेकिन उत्पाद शुल्क राजस्व इसे मैनेज करने में मदद करता है।
  • केंद्र का हिस्सा: UP को केंद्र के उत्पाद शुल्क का 17% मिलता है (जैसे FY22 में ₹6,693 करोड़), लेकिन राज्य का उत्पाद शुल्क असली खजाना है।

ये दिखाता है कि UP सिर्फ शराब पर निर्भर नहीं—वो एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना रहा है, जिसमें उत्पाद शुल्क स्टार है।

समेटते हुए: UP की शराब क्रांति

उत्तर प्रदेश का FY26 के लिए ₹63,000 करोड़ का उत्पाद शुल्क राजस्व लक्ष्य एक बड़ा दांव है, जो ई-लॉटरी नीति, प्रीमियम शराब ब्रांड्स में बढ़ोतरी, और ₹7,900 करोड़ के निवेश से चलेगा। FY17 के ₹14,273 करोड़ से इस मेगा लक्ष्य तक, UP ने अपने शराब के खेल को बदल दिया, भारत का टॉप उत्पाद शुल्क कमाने वाला बन गया। ये पैसा विकास को फंड करेगा, नौकरियां बनाएगा, और किसानों को बढ़ावा देगा, लेकिन नकली शराब या सामाजिक चिंताओं से निपटना होगा।

भाई, UP दिखा रहा है कि दारू को रुपये में कैसे बदला जाता है, वो भी बाजार को निष्पक्ष और पारदर्शी रखते हुए। क्या वो ₹63,000 करोड़ हासिल कर लेगा? योगी की टीम और नितिन अग्रवाल के साथ, मामला पक्का लग रहा है। तुम क्या सोचते हो—क्या UP इस शराब बढ़ोतरी को जारी रखेगा, या रुकावटें इसे धीमा करेंगी? अपने विचार बताओ, और देखते हैं ये देसी खजाना हमें कहां ले जाता है!

स्रोत:

  • द इकोनॉमिक टाइम्स, 12 मई 2025
  • द इकोनॉमिक टाइम्स, 11 मई 2025
  • बिजनेस स्टैंडर्ड, 13 फरवरी 2025
  • Studycafe.in, 12 मई 2025
  • बिजनेस स्टैंडर्ड, 14 अप्रैल 2023
  • द इकोनॉमिक टाइम्स, 2 अप्रैल 2024
  • टाइम्स ऑफ इंडिया, 16 अप्रैल 2023
  • हिंदुस्तान टाइम्स, 18 मई 2023
  • X पोस्ट by @StoxBox_, 12 मई 2025